मत बांधो इन ज़ुल्फो को
लहराने दो इन्हे हवायों में
आ जाती है ये जब तुम्हारे चेहरे पर
लगता है चाँद छुप गया है काली घटायों में
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गूज़र जाते हैं जब वो पास से अपनी आँखों को झुकाकर
झूम उठता है दिल उसकी सांसो के पास आकर
कोई पूछे उनसे क्यू नही करते इज़हार मोहब्बत का
क्या मिलता है उन्हे मुझे यू तड़पाकर
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हो जाती हैं खुशी से आँखें नम
जब मिल जाता है कोई हमदम
हर वक़्त दिल बस यही पूछता है
क्या दो गे मेरा साथ हर कदम
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सब की किस्मत एक जैसी नही होती
किसी की मौत पर ये दुनिया नही रोती
छोड़ चुके होते कब की यह दुनिया
अगर इस ज़िंदगी मे तुम्हारी मोहब्बत ना होती
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कुछ लोग पत्थर का दिल रखते है
बर्बादी पर वो हमारी हस्ते हैं
समझते नही वो हमारे ज़ज़्बात को
पर फिर भी वो इस दिल में क्यूँ बस्ते हैं
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